अगर गूगल की मानें तो विश्व के जीवित पुराने शहरों में इसका स्थान दसवाँ है और ये पाँच हज़ार साल पुराना है। शेष नौ इस प्रकार हैं - दमस्कस (सीरिया) 11000 साल, अलेप्पो (सीरिया) 8000 साल, बायबलॉस (लेबनान) 7000 साल, अर्गोस (ग्रीस) 7000 साल, एथेंस (ग्रीस) 7000 साल, सूसा (ईरान) 6300 साल, एर्बिल (इराक़ी कुर्दिस्तान) 6000 साल, सिडोन (लेबनान) 6000 साल, प्लोविदिव(बुल्गारिया) 6000 साल। लेकिन गूगल की इस सूचना को पश्चिम के ही विद्वान् गलत बताते हैं।मार्क ट्वेन की ये उक्ति कौन भूला होगा कि, “बनारस इतिहास से भी पुराना है, परंपरा से भी पुराना है, किंवदंती से भी पुराना है, और इन सभी को एक साथ देखने पर दोगुना पुराना लगता है।” अपनी प्रसिद्ध पुस्तक, Banaras City of Light में Diana L. Eck लिखती हैं कि, “बनारस और उसके समकालीनों में एक विशेष अंतर है। इसका वर्तमान जीवन छठवीं शताब्दी ईसा पूर्व से एक निरंतरता में बना हुआ है। यदि हम शास्त्रीय यूनान की बौद्धिक, सांस्कृतिक और अनुष्ठान परंपराओं के साथ अभी भी जीवित एथेंस के शांत एक्रोपोलिस और अगोरा की कल्पना करते हैं, तो हम काशी के जीवन को बहुत दृढ़ता से देख सकते हैं। पेकिंग, एथेंस और जेरूसलम आज बहुत अलग प्राचीन लोकाचार से प्रेरित हैं, लेकिन काशी नहीं।” जेरुसलम, मक्का, पेकिंग सभी कहते हैं कि उनका शहर विश्व की धुरी है। हिंदू कहते हैं कि काशी संसार के रचनाकाल के समय से पृथ्वी के मध्य में अवस्थित है और विश्व की समस्त पवित्रता को एक वृत्त में समेटे हुए है जिसे वो ‘मण्डल’ कहते हैं। काशी पृथ्वी का मध्य होते हुए भी पृथ्वी का हिस्सा नहीं है बल्कि पृथ्वी से ऊपर ‘तीर्थ’ के रूप में अवस्थित है जो इस संसार और उस संसार के बीच एक सेतु का काम करती है। मैक्समूलर कहते हैं कि, “जब बेबीलोन एक शुरुआत भर था और लार्ड नीनेवेह से संघर्ष कर रहा था, जब शुरुआती यहूदी नायक और राजा इज़राइल की जनजातियों को एक राष्ट्र के रूप में जोड़ रहे थे, जब फ़िनिशियाई भूमध्यसागर तक सीमित थे और अल्बियन के सफ़ेद चट्टानों तक पहुँचने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे, जब ग्रीक समुदाय आहिस्ता-आहिस्ता स्वयं को एक राष्ट्रमण्डल में परिवर्तित कर रहे थे, जब एथेंस एक नाम भर था और रोम अभी सोचा भी नहीं गया था, यहाँ शांत बहती गंगा और भीड़-भाड़ वाले उपजाऊ मैदानों के बीच विचारशील द्रष्टा और गर्व से भरे पुजारी, सौ मंदिरों में पूजा करने और उत्साही तीर्थ यात्रियों को सँभालने के लिए रहते थे। आर्यों के आगमन के एक झूठे सिद्धांत, जिसका कोई प्रमाण नहीं है, के आधार पर काशी या बनारस की प्राचीनता को कमतर बताने का प्रयास किया गया है। भारतीय अथवा विदेशी जो भी विचारक रहे हैं जिन्होंने काशी के आध्यात्मिक स्वरूप को पहचाना है उन्होंने साबित किया है कि ये एक सूक्ष्म ब्रह्मांड है जो पृथ्वी पर होकर भी पृथ्वी से इतर है। नोट: इसके दूसरे एपिसोड में हम उन तथ्यों पर विचार करेंगे जो इसे विश्व के प्राचीनतम जीवित नगर के रूप में स्थापित करते हैं। #banaras #banaras_varanasi_kashi #mecca #rome #kashi