हमारा आज का पड़ाव था त्रिलोचन घाट, कामेश्वर महादेव, आदि महादेव, त्रिलोचन महादेव, मतस्योदरी, ओम्कारेश्वर, ऋण-मोचन और बकरिया कुण्ड. हमने विशेश्वरगंज से काल भैरव वाले रास्ते से जाना तय किया. काल भैरव के ठीक पहले हम बाएं जाने वाली गली से गाय घाट की ओर घूम गए और गाय घाट पर गली में अपनी स्कूटी खड़ी कर दी. कुछ देर गाय घाट पर एक-दो तस्वीर लेकर हम उत्तर की ओर बढ़े जहाँ एकबार पुनः सीढियां चढ़ कर ऊपर दाहिनी तरफ नागेश्वर महादेव के मंदिर में गए. नागेश्वर महादेव मंदिर में गर्भ-स्थान के अन्दर एक छोटा सा शिवलिंग था जिस पर नाग की आकृति बनी हुई थी. शिवलिंग के पीछे भी एक धातु का नाग था जो शिवलिंग के ऊपर फन फैलाकर बैठा हुआ प्रतीत हो रहा था. मंदिर छोटा सा था और उसकी पश्चिमी दीवार के उत्तरी कोने में हनुमान जी की मूर्ति दीवार में ही बनी हुई थी. शिवलिंग काले पत्थर का था जबकि गर्भ-स्थान के पश्चिमी-उत्तरी हिस्से में संगमरमर की शिव-पार्वती की मूर्ति रखी हुई थी. मंदिर के दशिनी-पश्चिमी तरफ सफ़ेद पत्थर की नंदी जी की प्रतिमा विद्यमान थी. गर्भ-स्थान के पूर्वी कोने में धातु का एक त्रिशूल और डमरू भी लगा हुआ था. यहाँ पर एक-दो तसीरें लेने के बाद हम मंदिर से बाहर आ गए. मंदिर के बाहर सीढ़ियों के दूसरी ओर यानि की दक्षिण की तरफ श्री बद्री नारायण जी का मंदिर है. मंदिर के पिछले हिस्से में पुजारी जी का निवास मालूम पड़ रहा था. मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही दाहिनी ओर बद्री नारायण जी का गर्भ-गृह है. गर्भ-गृह में प्रवेश करने पर ऐसा प्रतीत हुआ कि जैसे इसे भी रिहाइश के लिए उपयोग में लाया जाता है. ऐसा मानने की वजह ये है कि इस कक्ष में बहुत से उपयोग किये गए वस्त्र यत्र-तत्र टांगे हुए थे. कक्ष में नीम अँधेरा था. पुजारी जी ने हमारी सुविधा के लिए कक्ष में लाइट जला कर उजाला कर दिया और हमें photo खींचने की अनुमति भी दी. बद्री नारायण जी की मूर्ति एकदम काले पत्थर की है और खड़ी अवस्था में एक ऊँचे प्लेटफार्म पर स्थापित है. मूर्ति एकदम सजीव लग रही थी. मूर्ति का धड़ वाला हिस्सा वस्त्रों से ढंका हुआ था जिसे हटाने के लिए पुजारी जी सहमत नहीं हुए. उन्होंने बताया कि मूर्ति का वस्त्र दिन में एकबार बदला जाता है और उस समय मंदिर के कपट बंद कर दिए जाते हैं. जितना भी मूर्ति का हिस्सा दृश्य था वो बहुत सजीव लग रहा था. बहार निकलने पर बात-चीत में पुजारी जी ने बताया कि काशी में विष्णु जी की केवल तीन प्राचीन मूर्तियाँ है जो शालिग्राम (काले पत्थर) से निर्मित हैं. क्रमशः जारी