फ़रवरी का महीना चल रहा था, कंपकंपाती ठंढ़ विदा हो चुकी थी। हालाँकि कई सालों से वैसी ठंढ़ अब पड़ती भी नहीं, ग्लोबल वार्मिंग का असर साफ़ साफ़ दिखने लगा है। बेटे Shivam Singh के विवाह की तैयारियां चल रही थीं। दोस्तों, परिजनों का आना जाना लगा हुआ था। एक शाम जब मैं अपने बरामदे में बैठा कॉफ़ी की चुस्कियों से ठंढ़ को दूर करने की कोशिश कर रहा था मेरे मित्र Sharad Nagar और Shubham Keshari का पदार्पण हुआ। वो लोग भी शादी की तैयारियों का जायजा लेने आए थे पर बातों-बातों में शुभम ने कहा कि बहुत दिनों से मन में एक इच्छा पल रही है कि एक इंटरनेशनल फोटो टूर किया जाए। नागर जी ने बहुत उत्साह दिखाते हुए कहा कि गुरु जी बनाइए एक प्लान चलते हैं। शुभम् को हम लोग गुरु जी कहते हैं ये दीगर बात है कि वो उम्र में हमसे आधे ही हैं। नागर जी की सहमति मिलने से शुभम् बहुत उत्साहित हुए और उन्होंने कहा कि ठीक है मैं आवश्यक जानकारियां जुटाता हूँ वियतनाम के फोटो टूर के लिए।

बात आई- गई हो गई और मैं शिवम् की शादी की तैयारियों में व्यस्त हो गया। शादी बीतने के बाद एक दिन शुभम का फ़ोन आया कि फाइनल कीजिए कि चलना है वियतनाम ? मैंने कह दिया हाँ नागर जी चल रहे हैं तो मुझे कोई दिक्कत नहीं है।उसने कहा कि मैंने चार लोगों से बात कर ली है बाक़ी आप, मैं, नागर जी और सी पी को मिलाकर आठ का ग्रुप बन जाएगा। लेकिन जब नागर जी से बात हुई तो उन्होंने जाने में असमर्थता व्यक्त की क्योंकि वो इसी बीच भूटान का एक ट्रिप कर आए थे। शुभम ने कहा कि कोई बात नहीं है कई लोग जाने में उत्सुक हैं इसलिए आठ का ग्रुप हो जाएगा। मैंने कह तो दिया था कि जाऊँगा पर भीतर से अभी तैयार नहीं हो पाया था। मेरी बीमारी के कारण मस्तो भी थोड़ा भयभीत ही रहती हैं। पर मन में एक दबी इच्छा जोर मार रही थी कि एक विदेश भ्रमण करना ही है और इससे अच्छा अवसर फिर इतनी जल्दी मिलने वाला भी नहीं था। मेरी एक बहुत बड़ी कमजोरी ये है कि मैं अकेले यात्रा नहीं कर सकता और अभी बच्चों के पास इतना समय नहीं है कि वो मुझे और मस्तो को लंबी यात्राएँ करा सकें।इसलिए भी मेरे लिए एक अवसर था जहाँ आठ लोगों का साथ मिल रहा था।मैंने टिकट के लिए पैसे शुभम को भेज दिए। मस्तो और Rahul Jaiswal और Aparna Singh को बताया तो वो लोग भी बहुत आश्वस्त नहीं हो पा रहे थे। मैंने ही उन्हें आश्वस्त किया कि चिंता मत करो साथ में एक अनुभवी डॉक्टर भी जा रहे हैं। इस ट्रिप के लिए डॉक्टर Jayant Mathur जी ने भी अपनी सहमति व्यक्त कर दी थी। 21 अप्रैल को दिल्ली से हो ची मिन्ह का टिकट हो गया, ये टिकट एयर इंडिया का था। अभी वाराणसी से दिल्ली के लिए ये तय नहीं हो पा रहा था कि ट्रेन से चला जाय या फ्लाइट से। शुभम को ट्रेन में कैमरा गियर्स की सुरक्षा पर संदेह हो रहा था। मैं ट्रेन से जाने के पक्ष में था। पर ट्रेन से जाने पर सुबह के कार्यक्रमों के लिए होटल लेना पड़ता और फिर फ्लाइट के लिए भी भागम- भाग करनी पड़ती अतः यही तय हुआ कि अगर सुबह की फ्लाइट में टिकट मिल जाय तो ले लिया जाय। आख़िर 5 जून को एयर इंडिया एक्सप्रेस में वाराणसी से दिल्ली का टिकट मिल गया जो 7.40 पर चल कर 9.15 पर दिल्ली पहुँच रही थी। वहाँ से हो ची मिन्ह के लिए फ्लाइट 1.00 अपराह्न पर थी। अच्छी बात ये थी कि हमारी बनारस से दिल्ली की फ्लाइट टर्मिनल 3 पर थी और हो ची मिन्ह की फ्लाइट भी उसी टर्मिनल से थी। अन्यथा दिल्ली में टर्मिनल दूर-दूर हैं और लगेज के साथ बहुत दौड़ भाग हो जाती। शुभम ने vietnam tour official नाम का एक ह्वाट्सऐप ग्रुप बना लिया था जिससे सबसे एक ही बार में संदेशों का आदान प्रदान हो जा रहा था। और जितने भी टिकट हो रहे थे वो और वीज़ा, ट्रैवल इंश्योरेंस सारे उस पर डाल देने से उनकी एक साथ उपलब्धता भी आसान हो गई थी। फिर जून में वापसी का टिकट भी शुभम ने करा लिया, साथ में 8 सितंबर का Cam Ranh International Airport से Noi Bai International Airport का टिकट भी हो गया। अब हमारे पास यात्रा के सारे टिकट हो चुके थे।लोकल यात्रा Binh Y?n को करवानी थी। उस समय लगता था कि अभी तो बहुत समय है और टिकट हो जाने के बावजूद यात्रा को लेकर कोई बहुत उत्सुकता जागृत नहीं हो पायी थी। पर समय की अपनी गति है और वो कभी रुका है कहीं? देखते-देखते अगस्त आ गया और अब लगने लगा कि अब कितने दिन बचे ही हैं। फिर वीज़ा के लिए आवेदन किए गए, ट्रैवल का बीमा लिया गया। डॉलर एक्सचेंज कराए गए। किसी मित्र ने ये सलाह दी थी कि एयरपोर्ट पर रेट अच्छा नहीं मिलता है इसलिए डॉलर यहीं एक्सचेंज करा लिया जाये। फिर किसी ने बताया कि बैंक भी डॉलर एक्सचेंज करने में नखरे करते हैं हैं अतः किसी रजिस्टर्ड एजेंसी से लेना सबसे बेहतर विकल्प होगा।राहुल ने इस काम में हमारी मदद की और एक एजेंसी से बात करके उचित दर पर डॉलर एक्सचेंज कराने की व्यवस्था कर दी।

अब जो सबसे बड़ी समस्या हमारे समक्ष खड़ी हुई वो थी शाकाहारी भोजन की। वियतनाम के लोग मूल रूप से मांसाहारी होते हैं और मछली के अलावा कुत्ते, बिल्ली, सूअर सब खाते हैं।अंडा उनके यहाँ शाकाहार माना जाता है। मैंने बिन्ह से मैसेंजर पर इसकी चर्चा की तो उसने कहा कि वो कोशिश करेगा कि हमें जहाँ तक संभव हो वीगन रेस्तराँ में ले के जाएगा, अन्यथा की स्थिति में फल हैं और वो वियतनाम में प्रचुर मात्रा में मिलते हैं और सस्ते भी होते हैं। फिर भी हम भारतीय लोग इस मामले में किसी पर भरोसा नहीं करते लिहाजा हमने ढेर सारा मैगी, पोहा, चिवड़ा, लाई, चना और तरह-तरह की मिठाइयों से अपने बैग भर लिए।कपड़े के नाम पर कुछ लोअर और टी शर्ट बस। इंटरनेशनल फ्लाइट में तो 25 किलो सामान ले जा सकते हैं पर डोमेस्टिक फ्लाइट में केवल 15 किलो ही ले जा सकते हैं। देश में ही यात्रा के लिए फ्लाइट का विकल्प इस मामले में नुकसानदेह साबित हुआ क्योंकि अब हम 15 किलो सामान ही ले जा सकते थे और हमारा साठ प्रतिशत समान खाने का ही हो गया था। एक और समस्या हमारे सामने आई कि वहाँ रहते हुए अपने लोगों से और वहाँ अपने ग्रुप से कैसे कनेक्टेड रहेंगे। एयरटेल कह तो रहा था कि उनका इंटरनेशनल रोमिंग 133 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से लेगा लेकिन जब चार्ज कराने गए तो दो सौ रुपए प्रतिदिन माँग रहा था। फिर शुभम ने बताया कि बहुत ऐप हैं जो e-sim देते हैं और डेटा होने से हम ह्वाट्सऐप कॉल के द्वारा सबसे जुड़े रह सकेंगे। मैंने saily से e-sim लिया और तीन G B डेटा का प्लान ले लिया जो वियतनाम में लैंड करते ही अपने आप एक्टिवेट हो गया। अब हम सब इस बहु प्रतीक्षित यात्रा के लिए तैयार हो चुके थे। बनारस से दिल्ली जाने वालों में बाकलम ख़ुद मैं, डॉक्टर माथुर, शुभम् केशरी और चंद्र प्रकाश सिंह थे। दिल्ली में हमे मिलने वाले थे Vijendra Trighatia, Ghanshyam Desai, Sanjay Jain और Chetna Chandra।दो सितंबर को मैंने और चन्द्र प्रकाश सिंह राजपूत ने खाने के लिए कुछ और खरीददारी की। चन्द्र प्रकाश के लिए आगे के वर्णन में सरलता के लिए सी पी कहेंगे। क्रमशः